Qabron ki zayarat
★ नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : मैं ने तुम्हें क़ब्रों की ज़ियारत से मना किया था, अब तुम भी उन की ज़ियारत किया करो।
मुस्लिम-कित्ताबुल् जनाइज़, हदीस न० 9777, यह जियारत इस लिये जाइज़ नहीं कि वहां पर शिर्क- बिदअत के कार्य किये जायें, बल्कि आख़िरत को याद किया जाये और क़ब्र वालों के लिये मग़फ़िरत की दुआ की जाये (रफ़ीक़ी)
★ एक रिवायत में है: क़ब्रों की ज़ियारत मौत को याद दिलाती है।
शैख़ अलबानी रह० फ़रमाते हैं: नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़ब्रों की ज़ियारत करने वाली महिलाओं पर लानत की, मगर इस के बाद आपने अनुमति देदी तो इस में मर्द और महिला दोनों शामिल हैं। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक ऐसी महिला के पास से गुज़रे जो क़ब्र पर बैठी रो रही थी, तो आप ने उसे अल्लाह से डरने और सब करने का हुक्म दिया।
★ अगर महिलाओं का कब्रिस्तान जाना ना जाइज़ होता तो आप उस को कब्रिस्तान में आने से भी मना करते।
★ हज़रत आइशा रज़ि० अपने भाई अब्दुर्रहमान की क़ब्र पर गयीं तो उन से कहा गया, क्या नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने (महिलाओं को) इस से मना नहीं किया था? तो आइशा रज़ि० ने फ़रमायाः पहले मना किया था परन्तु अब इजाज़त दे दी है।
★ हज़रत आइशा रज़ि० फ़रमाती हैं, मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा: जब में कब्रिस्तान में जाऊँ तो कौनसी दुआ पढ़ें? आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उन्हें दुआ सिखाई।
इस से भी मालूम हुआ कि महिलाओं का कब्रिस्तान जाना जाइज़ है।
★ हज़रत अबू हुरैरा रज़ि० से रिवायत है: "नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़ब्रों पर जाने वाली महिलाओं पर लानत फ़रमायी है।
★ नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया :
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★ जो शख़्स क़ब्रों की ज़ियारत करने जाये वह यह दुआयें पढ़ेः
السَّلَامُ عَلَى أَهْلِ الدِّيَارِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ وَيَرْحَمُ اللَّهُ الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنَّا وَالْمُسْتَآخِرِيْنَ وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ بِكُمْ لَلَاحِقُوْنَ
★ मुस्लिम शरीफ़ ही की एक रिवायत में यह शब्द भी हैं। अस्- अलुल्ला - ह लना व लकुमुल् आफि-य-त
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